holi ka tyohaar kyu manaya jata hai | क्यों मनाई जाती है होली

दोस्तों india में  रहने वाला ऐसा कोई  भी  इंसान नही  होगा  जो  होली  त्यौहार के  बारे  में  ना जनता  हो  लेकिन  ये  बात बहुत  कम लोग  जानते होंगे  की  होली  का  त्यौहार  क्यों  मनाया  जाता  है   होली को  लोग  क्यों  बढ़ी  धूम  धाम  से मानते  है  आप  को  तो  पता  ही  होगा  होली  को  लोग  प्राचीनकाल  से  मानते  आ  रहे  है  और  हमारे  घर  के  बढे बजुर्ग ये  बात जानते  है  की  होली  का   त्यौहार  क्यों  मनाया  जाता  है   और  अगर  आप  ये  बात  नही  जानते  तो  आज  मैं  आप  को  बताने  जा रहा हु होली क्यों मनाई जाती है

 

holi kyu manate hai

 

होली तो प्राचीनकाल से हम लोग मानते आ रहे है और हम होली को दो दिन celebrate  करते है पहले दिन हम होलिका जलाते है जिसे हम होलिका दहन कहते है और दुसरे दिन हम होली को बढ़ी धूम धाम से मानते है और एक दुसरे ओ रंग लगाते है और एक दुसरे से गले मिलते है लेकिन होली मानते क्यों है आइये जानते है

 

holi ka tyohaar kyu manaya jata hai – holi kyu manate hai

 

सच बताऊ तो मुझे खुद आप को नही पता था की होली क्यों  मनाई जाती है लेकिन मैंने इस बारे में घर के बढे बजुर्गो  से इस बारे में पुशा और मुझे इस question का answer मिल गया और आज मैंने सोचा की ये question बहुत लोगो के दिमाग में होगा तो क्यूना इसे सब के साथ share किया जाये दोस्तों होली का त्यौहार को बढ़ी धूम धाम से मनाने के पीशे कोई एक कहानी      ( कथा ) नही है होली को मनाने के पिशे बहुत सी  कहानिया ( कथाए ) है और आज मैं आप को वो सभी कहानिया ( कथाए ) बताने जा रहा हु

 

 

होली क्यों मनाई जाती है – पहली कहानी

हिमालये की पुत्री पार्वती जी  शिव जी से विवाह करने के लिए बहुत कठोर तप करने लगी और पार्वती के कठिन ताप को देखते हुये सभी देवता भी यही चाहते थे की पार्वती का विवाह शिव जी से हो जाये और इंद्र भगवान भी यही चाहते थे की शिव पार्वती का विवाह हो जाये क्यों की इंद्र भगवान जानते थे की शिव और पार्वती  के पुत्र के हाथो ही ताडकासुर का वध होना है और इंद्र भगवान बहुत देर से wait कर रहे थे की कब शिव जी अपनी तपस्या को शोड़े और उन्हें पार्वती के साथ विवाह के लिए मनाये लेकिन शिव अपनी तपस्या  में लीन थे और दूसरी और पार्वती भी शिव से विवाह के किये कठोर तप  कर रही थी इसी बिच इंद्र  ने सोचा क्यूना शिव का तप तोड़वा दिया जाये और उन्हों ने ऐसा ही किया उन्हों ने कामदेव को शिव की तपस्या भंग करने भेजा लेकिन क्रोधित शिव ने कामदेव को भस्म कर दिया दिया लेकिन इसी बिच इंद्र ने शिव को पार्वती  से विवाह के लिए मना लिया और शिव पार्वती का विवाह फल्गुन पूर्णिमा को हुआ था और इस दिन ही होली मनाई जाती है  और इस दिन देवताओ और सभी  लोगो ने बढ़ी धूम धाम से मनाया और आज भी लोग इस दिन को हम सभ बढ़ी धूम धाम से मानते है

 

दोस्तों ये थी होली की पहली कहानी लेकिन होली की  दूसरी कहानी कोन सी है आइये जानते है  🙂

 

होली क्यों मनाई जाती है –  दूसरी कहानी

 

प्रह्लाद और होलिका की कथा तो शायद आप ने सुनी ही हो क्युकी ये कथा तो बहुत प्रसिद्ध है मैंने ये कथा पहले भी सुनी थी लेकिन मुझे पता नही था की इस वझे से ही हम होलिका दहन करते है और होली मनाते है ये कथा शुरू होती है हिरण्यकश्यप से जो एक राजा था  जिसने अपनी कठोर तपस्या से भगवान शिव से वरदान माँगा कभी ना मरने का और ये वरदान हिरण्यकश्यप का पूरा हो गया और वो अमर हो गया और  वो अपने आप को भगवान समजने लगा और  वो अपनी पूरी प्रजह से  जय हिरण्यकश्यप का जाप करवाता था और मजबूरन लोगो को जय हिरण्यकश्यप का जाप करना पढता था और हिरण्यकश्यप की पूजा करनी पढ़ती थी लेकिन  हिरण्यकश्यप का पुत्र प्रहलाद ये बात नही मानता था और वो भगवान विष्णु की पूजा करता था और जय विष्णु भगवान का जाप करता था और जब ये बात राजा हिरण्यकश्यप को पता लगी की उसका पुत्र प्रहलाद  भगवान विष्णु की पूजा करता है तो हिरण्यकश्यप ने प्रहलाद को प्यार से समझाने की कोशिश की लेकिन प्रहलाद विष्णु जी का बहुत बढ़ा भगत था और वो ये बात मनाने को त्यार नही था  फिर हिरण्यकश्यप  ने प्रहलाद से कहा की वो जय हिरण्यकश्यप का जाप करे नही तो मैं तुम्हे मर दुगा लेकिन प्रहलाद  ने उसकी एक नही सुनी  और वो जय विष्णु का जाप करता करता रहा और हिरण्यकश्यप की एक बहन थी जिसका नाम होलिका था  और  हिरण्यकश्यप ये बात जनता था की उसकी बहन को भी शिव ने वरदान दिया है कभी ना जलने का और हिरण्यकश्यप ने होलिका के साथ मिलकर कर एक योजना बनाई की वो प्रह्लाद को आग में गोद लेकर बेठ जाये और  प्रह्लाद जलकर खाख हो जायेगा और वो जित जेयगा लेकिन हिरण्यकश्यप की योजना सफल नही हुई  प्रह्लाद जय विष्णु का जाप करता रहा और अग्नि देवता ने प्रह्लाद को शुआ तक नही और होलिका जलकर राख हो गई और विष्णु ने हिरण्यकश्यप को मार दिया और अंत में प्रह्लाद  की जीत हुई  और प्रह्लाद  की जित की कुशी में आज भी होली का त्यौहार मनाया जाता है

 

लेकिन होली में रंग लगाने वाला रिवाज कैसे शुरू हुआ :  तीसरी कहानी

होली में रंग लगाने का रिवाज भगवान विष्णु के अवतार भगवान कृष्ण ने शुरू किया भगवान कृष्ण होली का त्यौहार रंगों से मनाते थे और बहुत शैतानियां करते थे करते थे और  नगरवासी राधा-कृष्ण के प्रेम रंग में डूब जाते थे  और  होली को बढ़ी धुम धाम से मनाते है   और धीरे धीरे  मथुरा-वृंदावन की होली रंगों भरी हो गयी और देखते देखते सभी लोग होली को रंगों के साथ मनाने लगे और  आज भी ये रिवाज चला आ रहा है

 

 

आख़री बात ;

दोस्तों आप के question का answer  आप को ऊपर मिल गया होगा और आप समज गये हो होंगे  की  होली क्यों मनाते है  और निचे comment कर के जरुर बताइयेगा आप को ये article कैसा लगा और अगर आप को इस  article में कुश गलत लगा तो निचे comment कर के बताइयेगा और अगर आप कोई और कारन भी जानते है की  होली क्यों मनाई जाती है तो निचे comment box में बताइये मैं आप के सुझाव को अपने इस article में add करुगा और इस  article को अपने दोस्तों के साथ share करना भी ना भूले

thanks for visting 

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